श्री ब्राह्मणी माता मंदिर-डिंगुचा

डिंगुचा गांधीनगर जिले में कलोल तालुका में एक गांव है और यह गांधीनगर से 22 किलोमीटर दूर स्थित है। पंसार, भड़ोल, नारदीपुर, भावपुरा, नवा पास के गाँव हैं और कलोल, गांधीनगर, कादी, मनसा, डिंगुचा के नजदीकी शहर हैं। डिंगुचा पिन कोड 382740 है और डाक प्रधान कार्यालय पंसार है।

ब्रह्माणी माताजी डिंगुचा की ‘आराध्या देवी’ हैं। माताजी सफेद वस्त्र पहने हुये हैं और उनके चार हाथ हैं। एक हाथ में कमल, दूसरे हाथ में माला, तीसरे हाथ में अमृत कमंडल और चौथा हाथ वरद मुद्रा में हैं और वे हंस पर सवार हैं। इसके निर्माण के बारे में एक दिलचस्प किद्वंती  हैं। एक बार डोडिया राजपूतों ने भवन निर्माण के लिए सामग्री लाने के लिए ईडर के पहाड़ी इलाकों में गए। माल ढोने के लिए बैलगाड़ी को छोड़कर कोई परिवहन उपलब्ध नहीं था। उन्होंने गाड़ी में सामग्री डाल दी लेकिन गलती से वापस आते समय उन्होंने गलत रास्ता पकड़ लिया। इलाका ऊबड़-खाबड़ था और पत्थरों से इतना भरा हुआ था कि बैलगाड़ियां आगे नहीं चल पा रही थीं। सभी लोग तनावग्रस्त और चिंतित थे, आखिर में उन्होंने देवी माता का सहारा लिया। कुछ समय के बाद एक चमत्कार हुआ। भूरे रंग की आंखों वाली दो बहनें कहीं से भी निकलीं और उन्होने राजपूतों से सवारी देने का अनुरोध किया। चालक ने जवाब दिया कि बैल बहुत थक गए हैं, इसलिए वह उनकी मदद करने में असमर्थ हैं। इस पर, बहनों ने कहा कि अगर उन्हें बैठने दिया जाए तो सब ठीक हो जाएगा। उनके अनुरोध और सुनसान रास्ता होने के कारण, राजपूतों ने सहमति जताई और पल भर में दोनों बहनें बैलगाड़ी में बैठ गई। उनके बैठते ही बैलगाड़ीयाँ भागने लगी। इस पर चालक बहुत चकित हुये। एक बहन बिना किसी को बताए, डिंगुचा के रास्ते में, रायण तलावड़ी में सुंदर तालाब के पास गाड़ी से उतर गई और रायण या खिरनी के एक पेड़ के नीचे बैठ गई। दूसरी बहन भी कंटीली झाड़ियों के बीच डिंगुचा के पूर्वी प्रवेश द्वार पर बिना किसी को बताए नीचे उतर गई। गाँव में सुरक्षित पहँचने पर चालक ने महसूस किया कि दोनों बहनें अब उनके साथ नहीं थीं। उनकी अनुपस्थिति पर आश्चर्यचकित होकर उन्हें खोजना शुरू किया लेकिन सब व्यर्थ गया। उस रात उन्हें सपने में माँ के दिव्य दर्शन हुये और माताजी ने बताया कि माता करहरिजी (क्लेश हरनी माताजी), पहली बहन के रूप में रेयान तलावड़ी में और माता ब्राह्मणीजी, दूसरी बहन के रूप में डिंगुचा पहुंची हैं। वहाँ पर उनका मंदिर बनाया जाये। तब गाँव वालों ने गाँव के पूर्वी प्रवेश द्वार पर एक छोटे से मंदिर का निर्माण किया और माता ब्रह्माणी की पूजा शुरू कर दी।

इस मंदिर का दो बार जीर्णोद्धार हुआ और दोनों पुनर्निर्माण के पीछे का इतिहास अलग हैं। 80 से अधिक साल पहले कुछ पटेल व्यापार करने के लिये रंगून गए थे। क्रांति के कारण, उन्हें अपनी संपत्ति और पैसे छोड़कर आने के लिए मजबूर होना पड़ा । उन्होने जान बचाने के लिये बांस के घने जंगलों वाली पहाड़ियों से होकर घर वापस जाना उचित समझा। अपनी यात्रा के दौरान वे लोग असम के बीहड़ इलाकों में रास्ता भूल गए और बाहर निकलने में असमर्थ हो जंगलों में खो गए। दुखी हो कर वे सभी माँ ब्राह्मणजी से प्रार्थना करने लगे कि “माँ कृपया हमें बचाएं और सुरक्षित घर पहुँचने में हमारी मदद करें।” उस क्षण फिर से एक चमत्कार हुआ, सफेद बालों वाली एक छोटी लड़की दिखाई दी। उसने उन्हें चिंता न करने के लिए कहा कि वह उनका मार्ग-दर्शन कर, उन्हें जंगलों से बाहर आने के रास्ते पर ले जाएगी। और फिर वापस डिंगुचा की  यात्रा कैसे खत्म हुई, किसी को एहसास नहीं हुआ। जब वे घर पहुँचे तो उन्हें पता चला कि जंगलों में उनकी मदद करने वाली लड़की कोई साधारण लड़की नहीं बल्कि माता ब्रम्हाणीजी थी। उसके बाद उन्होंने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया और इसे पहले से बड़ा बना दिया।

वर्तमान में डिंगुचा में मंदिर का निर्माण के लिये पटेल समुदाय के व्यापारी वर्ग और गाँववालों की एक बैठक बुलाई गई और सर्वसम्मति से मंदिर का जीर्णोद्धार करने का निर्णय लिया गया। अहमदाबाद में “श्री ब्रह्माणी माताजी चैरिटेबल ट्रस्ट” का गठन किया गया। ट्रस्ट में लाखों रुपयों का चंदा इकठ्ठा कर के दो साल के भीतर छोटे मंदिर को बड़े और सुंदर मंदिर में बदल दिया गया। सन् 1996 फरवरी को इस नये मंदिर का उद्धाटन हुआ।

आरती का समय: सुबह– 6.00 और शाम-7.00

पता:

पंजीकृत ट्रस्ट कार्यालय का पता:
श्री ब्राह्माणी माताजी चैरिटेबल ट्रस्ट
गाँव: डिंगुचा, तालुका: कलोल,
जिला: गांधीनगर-382740
टेली नम्बर:  + 91-2764-288081

डिंगुचा कैसे पहुंचे:

रेल मार्ग :

      • झूलासन रेल मार्ग स्टेशन से14 मिनट (5.1 किमी)
      • पानसर रेल मार्ग स्टेशन से डंगुचा 14 मिनट (6.2 किमी)

हवाई मार्ग :

सरदार वल्लभभाई पटेल हवाई अड्डा

सड़क मार्ग:

हवाई अड्डा से गांधीनगर 30 मिनिट और गांधीनगर से डिंगुचा की कुल दूरी 26.0 किलोमीटर है। बस-सबसे सस्ती यात्रा का साधन हैं।

सरदार वल्लभभाई पटेल हवाई अड्डा-डिंगुचा: GJ SH 133: 58 मिनट (41.2 कि.मी) 

वांकानेर- डिंगुचा: जीजे एसएच 318 और एनएच 947: 4 घंटे 37 मिनट (227.1 कि.मी)

डिंगुचा में बस स्टॉप:

      • पंसार बस स्टेशन
        कलोल; गांधीनगर; पंसार: 382740: 3.8 कि.मी
      • झूलासन बस स्टॉप
        झूलासन: 382705: 4.2 कि.मी
      • करजीसन बस स्टॉप
        करजीसन: 382705: 7.5 कि.मी
      • पलियाड बस स्टेशन
        GJ SH 217; पलियाड: 382735: 8.3 कि.मी

संदर्भ:

            • पंड़ित जयंतीलाल भाईशंकर त्रिवेदी
            • www.onefivenine.com
            • Gujrat Tourism site
            • Goole search
            • Google map

अनुरोध:

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