Brahmani

ब्राह्मी या ब्राह्मणी देवी

हंसारूढ़ा प्रकृर्तव्या सुकासुत्रका-मंड़ला

सुत्रम् च पुस्तकम् घटे ऊर्ध्व-हस्ता अद्वये शुभे॥

(रूपमंडंना)

वह सृष्टिकर्ता भगवान ब्रह्मा की शक्ति (शक्ति) है। उन्हें चार सिर और चार या छह हाथों से दर्शाया गया है। उनका शरीर सोने की तरह चमकीला है, वह पीले वस्त्र (पीताम्बर) और विभिन्न आभूषण पहनती है। वह अपने टोकरी के आकार के मुकुट, जिसे ‘करंड मुकुट’ कहा जाता है से अलग ही दिखती देती हैं । ब्रह्मा की तरह, वह माला, कमंडल या कमल का फूल, किताब या एक घंटी रखती है। वह पलाश के पेड़ के नीचे एक लाल कमल पर बैठी हुई है और उनका वाहन हंस है।

चतृर्भुजी:
पूर्व-करनगमा में वर्णित है कि वह अपने ऊपरी हाथों में शूल और माला रखती है और उनके निचले हाथ वरदान और अभय मुद्रा में हैं।
षष्टभुजी:
विष्णु धर्मोत्तर पुराण में ब्राह्मी देवी के छह हाथ होने का वर्णन है। बाईं ओर के तीन हाथों में क्रमशः पुस्तक, कमंडल और नीचे का हाथ अभय मुद्रा में हैं। दाईं ओर के हाथों में आग में घी डालने वाली चम्मच, फंदा और निचला हाथ वरदान मुद्रा में हैं। उन्होने हिरण की खाल को पोशाक के रूप में पहना हुआ है।

ॐ देवी ब्रहमाणी विदमहे, महाशक्त्यै च धीमहि।

तन्नौः देवी प्रचोदयात।।

हंस की प्रतीकात्मकता:

हंस के लिए संस्कृत शब्द हंसा और “राज हंसम्” या राजसी हंस हैं जो देवी सरस्वती का वाहन है। जो पवित्रता या सत्वगुण की उत्कृष्टता का प्रतीक है। हिंदू धर्म में हंस ऐसे संत लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो दुनिया में रहते हुये भी संसार से विलग रहते हैं, जैसे कि पानी में रह कर भी हंस के पंख पानी में भीगते नहीं हैं। ऐसा माना जाता है कि जब हंस को दूध और पानी का मिश्रण पिलाया जाये तो वह दूध को पानी से अलग कर देता है और केवल दूध पी जाता है। उसी तरह संत केवल सतमार्ग को ही चुनते हैं।

हंसः श्वेतो, बकः श्वेता, को भेदा बकाः हंसयो॥

क्षीर नीर विवके तु हंसो हंसाः बको बकाः॥

हंस और बगुला दोनों सफेद है, फिर हंस और बगुले के बीच अंतर क्या है? जिस तरह हम विवेक से पानी और दूध दोनों में भेद कर सकते हैं उसी तरह हंस एक हंस ही है और बगुला एक बगुला ही है!

पलाश का पेड़:

प्रकृति, भारतीय पौराणिक कथाओं के मूल में है और लोगों का मानना ​​है कि हिंदू धर्म एक गहन तत्ववादी है। कहते हैं कि अग्नि देव ने एक बार पृथ्वी पर एक फूल के रूप मे जन्म लिया और उस फूल को “पलाश” कहा जाता है। यह फूल जब पूरी तरह से खिलता है, तो एक चमकते हुये गहरे सिंदूरी रंग का होता है। पलाश मार्च के पहले सप्ताह में खिलता है और उस समय इन फूलों के पेड़ ऐसे दिखते हैं जैसे उन पर आग लगी हो।

औषधीय गुण:
पलाश के पेड़ के विभिन्न भाग, जैसे फूल, छाल, पत्ते और गोंद का उपयोग औषधीय प्रयोजनों के लिए किया जाता है। इसके कई उपचारात्मक गुण हैं:

•पेड़ की कृमिनाशक गतिविधि पेट के कीड़ों से छुटकारा पाने में मदद करती है।
• एंटीऑक्सीडेंट गुण यकृत विकारों को कम करने में मदद करते हैं।
• यह दस्त का प्रबंधन करता है क्योंकि इसमें रोगाणुरोधी और कसैले गुण होते हैं।
• पलाश के पत्तों के पाउडर का सेवन शरीर में ग्लूकोज चयापचय में सुधार करके रक्त शर्करा के स्तर को प्रबंधित करने में मदद कर सकता है।
• पलाश के पत्ते का जीवाणु-नाशक और सूजन-नाशक गुण त्वचा के संक्रमण को ठीक करने और घाव भरने में तेजी लाने में मदद करता है।
• पेड़ के फफूंद-नाशक और रोगाणुरोधी गुण योनि संक्रमण और मूत्र समस्याओं को कम कर सकते हैं।

संदर्भ:

The Story Of Matrikas – Hindu Mythology

https://sreenivasaraos.com/2012/10/07/saptamatrka-part-four/

www.sanskritimagazine.com/indian-religions/hinduism/sapta-matrikas-the-seven-divine-mothers/

kaulapedia.com/en/ashta-matrika/

Source The Story Of Matrikas – Hindu Mythology

www. templepurohit.com

https://en.wikipedia.org/wiki/Swan

https://www.1mg.com/ayurveda/palash-53

Photo: drik panchang. Com & google

BRAHMANI

Hamsarudha prakarrtavaya sukastraka-mandala।

Sutram cha pusthakam ghate urdhva-hastha advaye shubhe ।।

(Rupamandana)

She is the Shakti (power) of the creator Lord Brahma. She is depicted with four heads and four or six hands. Her body is bright as gold, she wears a yellow garment (Pitambara) and various ornaments. She can be distinguished by her basket-shaped crown called ‘Karanda Mukuta’.

Like Brahma, she holds a rosary, a kamandalu (water pot) or a lotus stem, a book or a bell. She sits on a red lotus beneath a Palash tree (Butea monosperma). Her mount is a swan.

When she is depicted with four hands:

Purva-karanagama states that she carries a prong and a rosary in her upper hands and her lower hands are in poses of bestowing boons and fearlessness.

When she is depicted with six hands:

Vishnu Dharmottara Purana describes Brahmi Devi as having six hands. Of the three hands on the left, the lowest one gestures fearlessness while the other two hold a book and a water pot. On the right, the lowest hand gestures wish fulfilment while the other two hold a noose and a ladle for pouring oblations of ghee into fire. It also mentions deer-skin as a part of her attire.

Aum Dhevee Brahmani Vidmahe ।

Maha-shakthiyai Cha Dhimahee ।

Thanno Dhevee Prachodayath ।।

Symbolism of the Swan:

The Sansksrit word for swan is hamsa and the “Raja Hamsam” or the Royal Swan is the vehicle of Goddess Saraswati which symbolises “Sattva Guna” or purity par excellence. In Hinduism swans represent saintly people who live in world without getting attached to it, just as a swan’s feathers do not get wet in water. It is said that when a mixture of milk and water is offered to a swan it separates the milk from the water and drinks only the milk.

haṁsaḥ śveto bakaḥ śvetaḥ ko bhedo bakahaṁsayoḥ ।
kṣīranīraviveke tu haṁso haṁsaḥ bako bakaḥ ॥

The swan is white, the crane is white,
what is the difference between the swan and the crane?
During discriminating between water and milk,
the swan is a swan while the crane is a crane!

Palash Tree:

Nature is at the core of Indian mythology and many believe that Hinduism has a deep animist essence. Some say that Agni, the Fire God was once born on earth and he took the shape of a flower. That flower is called “Palash” and when in full bloom, is of a fiery vermillion shade. Palash blooms in the first week of March and at that time, the flowering trees look like they are on fire.

Medicinal property:

The various parts of the Plash tree, like the flowers, bark, leaves and the seed gum are used for medicinal purposes. It has many curative properties:

  • The anthelmintic activity of the tree helps to get rid of stomach worms.
    • The antioxidant properties help to reduce liver disorders.
    • It manages diarrhoea as it has antimicrobial and astringent properties.
    • Consuming Palash leaf powder may help in managing blood sugar levels by improving the glucose metabolism in the body.
    • The antiseptic and anti-inflammatory properties of the Palash leaf helps in curing skin infections and speeding wound healing.
    • The antifungal and antimicrobial properties of the tree can reduced vaginal infections and urinary problems.
References:

The Story Of Matrikas – Hindu Mythology

Saptamatrka – Part Four

www.sanskritimagazine.com/indian-religions/hinduism/sapta-matrikas-the-seven-divine-mothers/

kaulapedia.com/en/ashta-matrika/

The Story Of Matrikas – Hindu Mythology

www. templepurohit.com

https://en.wikipedia.org/wiki/Swan

https://www.1mg.com/ayurveda/palash-53

Photo: drik panchang. Com & google

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