Vaishnavi

वैष्णवी

वैष्णवी विष्णु सदाक्षी गरूड़ा पाषि संस्थित ।

चक्रभुजा वरदा शंख चक्र गदाधरा ।।

(रूपमंडंना)

वैष्णवी भगवान विष्णु की शक्ति है। उनका रंग गहरा, सुंदर आंखें, सुंदर चेहरा हैं और वे उन्नत स्तनों वाली है। वे पीले वस्त्र, जंगली फूलों की माला धारण करती है और विष्णु की तरह ही कई आभूषणों से सुशोभित है। वैष्णवी एक बेलनाकार मुकुट पहनती हैं जिसे क्रीट मुकुट कहा जाता है। वह एक राज- वृक्ष के नीचे बैठती है। उनका वाहन गरुड़ है।

चतृर्भुजी:
देवी पुराण में कहा गया है कि उनके ऊपरी हाथ में शंख और चक्र है और निचले हाथ वरदान और अभय मुद्रा में है।

षष्टभुजी :
विष्णु धर्मोत्तर पुराण के अनुसार वैष्णवी के छः हाथ हैं। विष्णु की तरह ही उनके बाईं ओर के तीन हाथों में शंख, चक्र है और निचला हाथ आशीर्वाद मुद्रा में है। उनके दाहिने तीन हाथों में गदा, कमल है।और निचला हाथ अभय मुद्रा में है।

ॐ तार्क्ष्य ध्वजाये विदमहे,

चक्र हस्ताय धीमहि।

तन्नौः वैष्णवी प्रचोदयात।।

राज-वृक्ष की प्रतीकात्मकता:
राज-वृक्ष का उल्लेख पहली शताब्दी के ‘औपपातिक-सूत्र’ में पाया जाता है। आमतौर पर अमलतास या राज-वृक्ष प्राचीन भारत के जंगलों में बहुलता से होता था। यह मटर / फल्ली परिवार की एक प्रजाति है। अंग्रेजी में इसे इंडियन लबर्नम या गोल्डन शावर ट्री कहा जाता है। यह एक पर्णपाती या पतझड़ी पेड़ है, जो 15 मीटर तक ऊँचा होता है और इसमें लंबे पीले रंग के फूल होते हैं। यह पूरे भारत और भारतीय उप-देशों में भी पाया जाता है। यह केरल का राज्य फूल है और थाईलैंड़ का तो राजकीय वृक्ष और फूल हैं। यह एक सजावटी पौधे के रूप में भी लोकप्रिय है। इसकी पत्तियों का उपयोग कम गुणवत्ता वाले चारे के रूप में मवेशियों, भेड़ों और बकरियों को खिलाने के लिए किया जाता है।

औषधीय गुणवत्ता:
आयुर्वेदिक साहित्य, जैसे चरक-संहिता और सुश्रुत-संहिता में औषधीय गुणों के लिए इस वृक्ष का उल्लेख हैं। इसे ‘आरग्वध’ कहा जाता है, जिसका अर्थ है ’रोग नाशक’ और ’सर्वरोग- प्रशमनी’ वह जो सभी प्रकार के रोगों को ठीक करता है और शरीर को कई अणुजीवों के संक्रमणों से बचाता है।

इसमें जैविक सक्रिय गुणों की प्रचुरता हैं और इसके विरेचक, गैस-नाशक और खुजली नाशक गुण; कब्ज, आम सर्दी, आंत और त्वचा विकारों से राहत प्रदान कर के, प्रतिरक्षा को बढ़ावा देते हैं। घाव, अपच, पेट फूलना और सूजन का इलाज करते हैं, साथ ही हृदय की कार्यप्रणाली को बढ़ावा देते हैं और मधुमेह का प्रबंधन करते है। इस के फलों के गूदे को एक शुद्ध दवा माना जाता है, इसलिए बिना चिकित्सकीय देखरेख के स्व-दवा को दृढ़ता से निषिद्ध किया जाता है।

गरुड़ की प्रतीकात्मकता:
गरुड़ पक्षियों का राजा है और दिव्य चील जैसा दिखने वाला यह सूर्य पक्षी, पतंग जैसी आकृति वाला है। उन्हें आंशिक रूप से खुले पंखों के साथ एक विशाल पक्षी के रूप में दिखाया गया है। कभी-कभी उन्हें पंखों और कुछ पक्षी जैसी विशेषताओं वाले व्यक्ति के रूप में चित्रित किया जाता है। गरुड़ को विशेष शक्ति का मालिक माना जाता है, जिस से वे क्षण भर में कहीं भी पहुँच सकते हैं। उन्हें नाग-शत्रु और हमेशा चौकस रहने वाला कहा जाता है। गरुड़ पृथ्वी पर होने वाली सभी बुराईयों को खत्म करते हैं। स्वर्ग से पृथ्वी पर अमृत वे ही लाये थे।

भगवान विष्णु अन्याय से लड़ते हैं और अपने विभिन्न अवतारों में धर्म की रक्षा के लिए बुराई का नाश करते हैं। गरुड़ उनका वाहन है। उनका बाज़ जैसा रूप अकेले या विष्णु के साथ दिखाया गया है, जो उनकी शक्ति के दिव्य अनुमोदन को दर्शाता है। गरुड़ भारत, म्यांमार, थाईलैंड, कंबोडिया और इंडोनेशिया में राजकीय प्रतीक का एक हिस्सा है। इंडोनेशिया के राष्ट्रीय प्रतीक को ‘गरुड़ पंचशिला’ कहा जाता है।

महान महाकाव्य महाभारत में गरुड़ के जन्म की कहानी वर्णित है। जब गरुड़ अपने अंडे से बाहर आये, तो वह एक विशालकाय आग के गोले के रूप में प्रकट हुये, उसी आकार के समान जो हर युग के अंत में दुनिया को नष्ट करते समय महान जलप्रलय का होता है। इससे देवताओं ने भयभीत हो कर गरुड़ से दया की विनती की। उनकी विनती सुनकर कि गरुड़ ने उनके आकार और ऊर्जा को कम कर दिया।

गरुड़ की ‘गीद्ध दृष्टी’ अज्ञानता और गलत धारणाओं केबीच में से प्रत्येक स्थिति की सच्चाई को स्पष्ट रूप से देखने की क्षमता का प्रतीक है।

“हमारा सबसे गहरा डर यह है कि हम अनुमान से भी परे शक्तिशाली हैं। यह हमारा अंधकार नहीं वरन हमारा प्रकाश है, जो हमें सबसे ज्यादा भयभीत करता है।”
-मरीयन विलियमसन

विशेष रूप से हमारा मन अविश्वसनीय रूप से शक्तिशाली हैं; हमारी मनोदशा, तनाव का स्तर, चिंता और उदासी की दर सभी हमारी तंत्रिका और प्रतिरक्षा प्रणाली पर भारी प्रभाव डालती हैं, वैसे ही सुख, खुशी, आशा और आत्मविश्वास भी। बहुत बार हम अपनी खुद की शक्ति को कम कर आंकते हैं या इसका दुरुपयोग करते हैं। समस्या मन की शक्ति में नहीं है, बल्कि हम इसका उपयोग कैसे करते हैं, इसमें हैं। हम चाहे जो भी सोचे, लेकिन मन कोई बुरी चीज नहीं है, बस यह कभी-कभी दुनिया के जाल में फंस कर, भयभीत हो कर , सुरक्षात्मक हो जाता है, और जब हम इसे मनचाहा करने की छूट दे देते हैं, तब यह समस्या बन जाता है।

जिस तरह गरुड़ अपनी महान शक्ति का उपयोग, बुराई को दूर करने के लिए, विष्णु जो ‘जीवन के संरक्षक’ हैं उनका परिवहन बन कर, मानवता को अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने में मदद करने के लिए करते हैं, हमे भी बुराई पर अच्छाई के लिए अपनी शक्ति का उपयोग दूसरो की मदद करने के लिये करना चाहिये , बजाय नुकसान करने के लिये।

गरुड़ और योग

यह योग आसन – एक भौतिक आकार से अधिक सरल या कुछ भी नहीं लग सकता है, लेकिन वास्तव में इसके भीतर बहुत सारी ऊर्जा, शक्ति और अर्थ है। आसन का अभ्यास करते समय गरुड़ासन श्वास को अज्ञानता, मन-चंचलता और अहंकार को बाहर निकालने के उपकरण के रूप में उपयोग करता है।

संदर्भ:

The Story Of Matrikas – Hindu Mythology

https://sreenivasaraos.com/2012/10/07/saptamatrka-part-four/

www.sanskritimagazine.com/indian-religions/hinduism/sapta-matrikas-the-seven-divine-mothers/

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https://en.wikipedia.org/wiki/Cassia_fistula

https://en.wikipedia.org/wiki/Garuda

Photo: drik panchang.com

Pintrest, Wikipedia & google

 

 

VAISHNAVI

Vaishnavi Vishnu saddakshi Garudapasi samsthitha ।

Chaturbhuja varada shankha chakra gadadhara ।।

(Rupamandana)

Vaishnavi is the power of the Preserver-God Vishnu. She has dark in complexion, beautiful with full breasts, pretty eyes and a lovely face. She wears a yellow garment, a wild flower garland and is heavily adorned with many ornaments just like Vishnu. Vaishnavi wears a cylindrical crown called Kiriṭa Mukuṭa.

Like Vishnu, she holds a conch, a disc, a mace and a lotus. One hand is in blessing posture, the other bestows fearlessness. She sits under under a Raja Vriksha. Her mount is Garuda.

When she is depicted with four hands:

Devi Purana says that her upper hands hold a disc and a conch and her lower hands grant boons and fearlessness.

When she depicted as six hands:

Vishnu Dharmottara describes Vaishnavi having six hands. In her three hands on the left she has a conch, a disc and the lower one gestures blessing. Her three hands on the right hold a mace, a lotus and the lower of them, granting fearlessness.

Aum Taarksha dhwajaaye Vidmahe ।

Chakra Hastaya Dhimahee ।

Tanno Vaishnavi Prachodayat।।

Symbolism of the Raj Varksa:

Raj Varksa refers to a kind of tree commonly found in the forests of ancient India. It is a species of the pea/bean family of flowering plants. In English it is called the Indian laburnum or the Golden shower tree. It is a deciduous tree growing up to 15m high and has bright yellow flowers in long racemes. It grows all over India and it is the state flower of Kerala. It is also popular as an ornamental plant. Its leaves are used to supplement the diets of cattle, sheep and goats fed with low-quality forages.

Medicinal value:

Ayurvedic literature, such as the Charaka-saṃhitā and the Suśruta-saṃhitā mention this tree for its medicinal properties. It is also known as ‘aragvadha’, meaning “disease killer” and “sarvaroga prashamani” or “one that cures all types of diseases and shields the body against numerous microbial infections.”

The abundance of bioactive ingredients and its strong purgative, carminative, antipruritic and anti-inflammatory properties offer relief from constipation, common cold, intestinal and skin disorders, boost immunity, promote cardiac functioning, treat wounds, cure dyspepsia, prevent flatulence, inflammation and also manages diabetes.

The fruit pulp is considered a purgative, therefore, self medication of without medical supervision is strongly prohibited.

Garuda:

Garuda is the king of birds and described as a divine eagle-like sun bird, a kite-like figure. He is shown as a giant bird with partially open wings. Sometimes he is depicted as a man with wings and some bird-like features. Garuda is considered a protector with the power to swiftly go anywhere, ever watchful and an enemy of the serpent.

Garuda ‘devours’ all evil on earth. He is the one who brought ‘amrita’ or ’the nectar of life’ from heaven to earth.

Lord Vishnu fights injustice and destroys evil in his various avataras to preserve dharma. Garuda is His mount. His eagle-like form is shown either alone or with Vishnu, signifying divine approval of the power of his state. Garuda is a part of state insignia in India, Myanmar, Thailand, Cambodia and Indonesia. The national emblem of Indonesia is called Garuda Panchashila.

The great epic the Mahabharata tells the story of Garuda’s birth. When Garuda hatched from his egg, he appeared as a giant inferno, the same size as the great deluge which is said to destroy the world at the end of every age. This scared the gods, who pleaded with Garuda for mercy. Upon hearing how frightened the gods were, Garuda reduced his size and energy.

Garuda’s ‘eagle eye’ is symbolic of the ability to see clearly through ignorance and misconceptions, and look straight into the truth of each situation.

“Our deepest fear is that we are powerful beyond measure. It is our light, not our darkness that most frightens us”.

-Marianne Williamson

Our minds in particular are incredibly powerful; our mood, stress levels, rates of anxiety and sadness all have a huge impact on our nervous and immune systems, as does happiness, joy, hope and confidence. Too often do we diminish our own power or misuse it. The problem lies not in the power of the mind, but how we use it. Despite what we might think, the mind is not a bad thing, it just gets caught up in the ways of the world sometimes; it gets scared and protective, and when we let it run amok, that is when it becomes a problem.

Just as Garuda used his great power to ‘devour’ evil, to transport Vishnu – the preserver of life – and help humanity move from darkness to light, we too can practice using our own power for good over evil, to help ourselves rather than cause harm.

Garuda and Yoga

This yoga postures – may look simple or nothing more than a physical shape but in fact there is a whole lot of energy, power and meaning within it. When practicing the posture Garudasana uses breathing as a tool to expel ignorance, mind-chatter and ego.

References:

The Story Of Matrikas – Hindu Mythology

Saptamatrka – Part Four

www.sanskritimagazine.com/indian-religions/hinduism/sapta-matrikas-the-seven-divine-mothers/

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kaulapedia.com/en/ashta-matrika/

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